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October 13, 2007

नवरात्री के रंग

नवरात्री के रंग

लो जी श्राद्ध खत्म और नवरात्री आयी- कलकत्ता के पंडालों में, गुजरात के गरबे में, तमिलनाडू की गुड़ियों के त्यौहार में और न जाने कहाँ कहाँ। तो जी हम कैसे पीछे रहते। हमारा बम्बई तो वैसे ही न सिर्फ़ कॉसमोपोलिट्न है, मेरे अनुमान से 85% महिला जनता यहाँ काम पर जाती हैं।लाजिमी है कि त्यौहार भी वहीं मनाये जाए जहाँ हमारा ज्यादा से ज्यादा जीवन बीतता है।

कोल्हापुर में एक देवी का मन्दिर है, जिसकी बड़ी मानता हैवहाँ दसों दिन देवी का श्रंगार अलग अलग रगों के परिधानों से किया जाता हैमहाराष्ट्रा टाइअम्स नवरात्री से कुछ दिन पहले ही रोज इसकी सूची छापता है जो कुछ इस प्रकार है


तारीख देवी का रुप रंग

12/10/07 अंबा पोपटी (मतलब तोता रंग)
13/10/07 चामुंडा नारंगी
14/10/07 अष्टमुखी पीला
15/10/07 भुवनेश्वरी आस्मानी नीला
16/10/07 उंपागललिता गुलाबी
17/10/07 महाकाली ग्रे
18/10/07 जगदंबा हरा
19/10/07 नारायणी जामनी
20/10/07 रेणुका नीला
21/10/07 दुर्गा लाल

अब हमारे ग्रुप की सरगना (रमा) ने ये निश्चय लिया कि हम सब इसी सूची के अनुसार कपड़े पहनेगेऔर मर्द टीचर्स को भी यही नियम मानने होगेंजिस रंग के कपड़े नहीं हैंखरीदो, नियम तोड़ने वाले को सबको नाशता कराना पड़ेगाहमारे कॉलेज में डिग्री सेक्शन में ही साठ टीचर्स हैंलिस्ट नॉटिस बॉर्ड पर चिपका दी गयीक्या मजाल कि मर्द टीचर्स इसे मानेहम मन ही मन मुस्कुरा रहे थे- मर्दाना शर्ट वो भी पोपटी रंग कीहा, हा, हादेखें फ़ोटो, पर ठहरिए जी अभी महिला टीचरों पर भी आफ़त आनी थीये निश्चय लिया गया कि सिर्फ़ ये रंग के अनुसार कपड़े पहनने हैं , बल्कि महिलाएं सिर्फ़ साडियां ही पहनेगीअब जी जब सुबह सुबह 6:३० बजे घर से निकलना हो तो कहाँ साड़ी लपेटने का वक्त होता है, पर रमा के आगे कोई बोल नही सकताउसके पास हर बात की काट मौजूद रहती है












अब जी मेरे पास तो पोपट रंग की साड़ी थी ही नहीं, और नवरात्री के एक दिन पहले तक तो श्राद्ध थे, मन के अंध विश्वासों के चलते हम कुछ खरीदने वाले नही थे। हमने हरा रंग पहना और सब से कहा मेरा तोता अंग्रेजीस्तान से आया है, ठंडी के मारे रंग हल्का पड़ गया है, ही ही ही। खैर नाश्ता खिलाने से तो बच गये।

कॉलेज पहुँचे तो देख कर हैरान कि जुनियर कॉलेज के टीचर्स, नॉन टीचींग स्टॉफ़ (यहां तक की केटीन बॉय भी) सब तोते बने हुए। मर्द टीचर्स भी खुशी खुशी त्यौहार मनाने को हमारे साथ रंग बिंरगी होने को तैयार्। परिक्षाए चल् रही हैं बच्चे भी परीक्षा की चिन्ता के बीच हम सब को देख मुस्कुराए बिना न रह सके।

चलूं अब कल के लिए नारंगी रंग की साड़ी देखनी है। ओजी भाई लोग जो इस को पड़ रहे हैं इस नियमावली के अनुसार ही रंग पहनना, नहीं तो देवी माँ को प्रसन्न करने का मौका तो खो ही दोगे, सजा भी भुगतनी पड़ेगी-एक दिन में कम से कम बीस कमेंट्स्। बोलो क्या मंजूर- कल भगवा वस्त्र पहनेगे या बीस ब्लोग पढ़ेगें। हा हा हा अगली बार एक और छ्टा नव रात्री की

10 comments:

Mired Mirage said...

अनीता जी , इन रंगों की तानाशाही को मैं जहाँ पहले रह रही थी झेल चुकी हूँ । पूरे नौ दिन के रंग निश्चित हो जाते थे । मुझे उस तानाशाही से यहाँ आकर मुक्ति मिल गयी । विश्वास कीजिये मुझे अपने मन के कपड़े पहनना मुक्ति से कम नहीं लगता ।
घुघूती बासूती

ALOK PURANIK said...

बेहतरीन, रंगारंग

Sanjeet Tripathi said...

बहुत बढ़िया!!
ऐसे ही लिखते रहिए।
पन अपन ठैरे मूडी आदमी, कोई कित्ता भी बोल्ले कि ये पैनो वो पैनो पन अपन वईच पैनेंगे जो अपन को पैनने का मूड होगा!!

Gyandutt Pandey said...

1. यह तबला बढ़िया बजता है!
2. इस पोस्ट की चर्चा पत्नीजी से बिल्कुल नहीं की। तुरंत यह कहा जायेगा कि इस रंग की साड़ी तो है ही नहीं!

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा...आनन्द आया.

Niharika said...

I read "Navratri ke rang". yeah I can Imagine the scene in the collesge whn such a thing was decided.. specially for the male teachers also. It was also a symbol of unity and "grup" binding. GOod that us aved yourself from waer the parrot green colour :) and also from treating the staff !! hehehehhehe. All the best for the remaining days.

विकास कुमार said...

:)) kewal kalpanaa hi kar sataa hoon :)

हरिराम said...

काश! कि सिर्फ देवी के निर्धारित रंग के वस्त्र मात्र पहनने तक सीमित न रहतीं शिक्षिकाएँ। काश! कि देवी के एक निश्चित दिव्य गुण या शक्ति को धारण करने तथा अनुभव कराने का भी प्रयास करती गुरु-माताएँ!

Ajit Tiwari said...

Bahut achha laga...
aise hi likhte rahiye....

Jai Mata Ki


Ajit Tiwari
www.jaimaathawewali.com

गिरीश बिल्लोरे said...


विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

आपकी पोस्ट ब्लॉग4वार्ता पर