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सुस्वागतम

आपका हार्दिक स्वागत है, आपको यह चिट्ठा कैसा लगा? अपनी बहूमूल्य राय से हमें जरूर अवगत करावें,धन्यवाद।

February 27, 2008

ग्राहक सेवा

कल अंग्रेजी में एक लेख पढ़ा था जिसे पढ़ कर मुझे और मेरी सहेलियों को बहुत मजा आया, आप सके साथ बांट रही हूँ, देखिए आप को कैसा लगता है, हिन्दी में भी अनुवाद दे रही हूँ हालांकि उसमें वो मजा नहीं आयेगा जो अंग्रेजी में आयेगा……


ग्राहक सेवा
जिस जमाने में भारत में सार्वजनिक शौचालय की बहुतायत नहीं थी, एक अंग्रेज महिला ने भारत आने का मन बनाया।उसने एक छोटे से स्कूल के मास्टर धर्मशाला में अपने रहने के लिए बुकिंग कर लिया। लेकिन उसके मन में एक चिन्ता बनी हुई थी कि इस धर्मशाला में शौचालय है कि नहीं। अंग्रेजी में शौचालय को WC कहते हैं। उसने स्कूल मास्टर को एक खत लिख कर पूछा कि धर्मशाला में WC है कि नहीं। अब स्कूल मास्टर की अंग्रेजी भी जरा कमजोर थी, उसे समझ नहीं आया कि ये WC क्या है। तो वो गांव के चर्च के पादरी के पास चला गया, उसे भी नहीं मालूम था, दोनों ने बहुत दिमाग लगाया और इस नतीजे पर पहुंचे कि महिला “Wayside Chapel” के बारे में पूछ रही होगी। उस दोनों के दिमाग में ही नहीं आया कि WC का मतलब शौचालय हो सकता है। तो अब स्कूल मास्टर जी ने खत का जवाब लिखा

आदरणीय मैडम

मुझे आप को ये बताते हुए अति प्रसन्नता हो रही है कि WC घर से 9 मील दूर है, ये हरे भरे पाइन के पेड़ों से घिरा हुआ है, और यहां 229 आदमी एक साथ बैठ सकते है, ये इतवार और गुरुवार को खुला रहता है। ऐसी उम्मीद है कि गर्मियों के महीनों में यहां बहुत लोग आयेगें आप से निवेदन है कि आप जल्दी आने की कृपा करें। वैसे यहां खड़े होने की काफ़ी जगह है, त्रासदी की हालत तभी होगी अगर आप को रोज जाने की आदत हो तो।

आप को शायद ये जान कर अच्छा लगे कि मेरी बेटी की शादी WC में ही हुई थी क्योंकि वो अपने भावी पति को वहीं मिली थी। वो बहुत ही भव्य आयोजन था। हर सीट पर कम से कम दस आदमी बैठे थे और उनके चेहरों के हाव भाव देखने लायक थे। वहां हर कोण से फ़ोटो लिए जा सकते हैं। दुख की बात ये है कि मेरी पत्नी अपनी बिमारी के कारण अब वहां ज्यादा नहीं जा पाती। पिछली बार वो एक साल पहले गयी थी और इस वजह से बहुत पीड़ा झेल रही है।
आप को जान कर खुशी होगी कि कई लोग वहां अपने अपने खाने के ड्ब्बों के साथ आते हैं और पिकनिक मनाते हैं। कुछ लोग आने से पहले अंत समय तक इंतजार करते हैं। मैं आप को सलाह दूंगा कि आप वहां गुरुवार के दिन जाएं क्योंकि गुरुवार के दिन वहां संगीत का भी इंतजाम किया गया है और सब अच्छे से सुनाई देता है, यहां तक कि छोटी से छोटी आवाज भी बराबर सुनाई देती है।
और सबसे अच्छी बात तो ये है कि अब वहां एक घंटा भी लगा दिया गया है जो किसी के भी WC में घुसते ही बज उठता है। हम बहुत जल्द वहां एक बाजार लगाने वाले हैं जहां आरामदेह कुर्सियां मुहैया कराई जाएगीं जिसके लिए बहुत दिनों से लोग मांग कर रहे हैं। मैडम, मैं खुद आप को वहां ले जाऊंगा और ऐसी कुर्सी पर बिठाऊंगा जहां से सब आप को देख सकें।
शुभकामनाओं के साथ

आप का
स्कूलमास्टर
पत्र पढ़ते ही वो अंग्रेज महिला बेहोश हो गयी………और कभी भारत नहीं आयी………J


UNDERSTANDING CLIENT REQUIREMENTS


In the days when you couldn’t count on a public toilet facility, an English woman was planning a trip to India. She registered to stay in a small guest house owned by the local schoolmaster. She was concerned as to whether the guest house contained a WC. In England, a bathroom is commonly called a WC which stands for “Water Closet”. She wrote to the schoolmaster inquiring of the facilities about the WC.

The school master, not fluent in English, asked the local priest if he knew the meaning of WC. Together they pondered over possible meanings of the letter and concluded that the lady wanted to know if there was a “Wayside Chapel” near the house…..a bathroom never entered their minds.

So the schoolmaster wrote the following reply:

Dear Madam

I take great pleasure in informing you that the WC is located 9 miles from the house. It is located in the middle of a grove of pine trees, surrounded by lovely grounds. It is capable of holding 229 people and is open on Sundays and Thursdays. As there are many people expected in the summer months, I suggest you arrive early. There is, however, plenty of standing room. This is an unfortunate situation especially if you are in the habit of going regularly.

It may be of some interest to you that my daughter was married in the WC as it was there that she met her husband. It was a wonderful event. There were 10 people in every seat. It was wonderful to see the expressions on their faces. We can take photos in different angle. My wife, sadly, has been ill and unable to go recently. It has been almost a year since she went last, which pains her greatly.

You will be pleased to know that many people bring their lunch and make a day of it. Others prefer to wait till the last minute and arrive just in time. I would recommend your ladyship to plan to go on a Thursday as there is an organ accompaniment. The acoustics are excellent and even the most delicate sounds can be heard everywhere.
The newest addition is a bell which rings every time a person enters. We are holding a bazaar to provide plush seats for all since many feel it is long needed. I look forward to escorting you there myself and seating you in a place where you can be seen by all.

With deep regards

The schoolmaster


The woman fainted reading the reply…..and never visited India!!!!!

13 comments:

Sanjeet Tripathi said...

धांसू!!!!!!!!!!!!!!!

आशीष said...

यदि इसे आज की सबसे शानदार पोस्‍ट कहा जाए तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी और हां आफिस के तनावपूर्ण माहौल में मुस्‍कुराने का एक मौका देने के लिए शुक्रिया

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत बढ़िया.!!

कमलेश मदान said...

वाकई में लिखना कोई आपसे सीखे! आप का लिखा हमेशा से लोकप्रिय और सरल रहा है,आप लिखते रहें और हम पढते रहेंगें.

कमलेश मदान

मीनाक्षी said...

हा हा.... बहुत खूब...सोच रहे हैं...सामने बैठकर आपसे सुनी होती तो मज़ा दुगुना हो जाता है..

राज भाटिय़ा said...

लेख तो आप का बहुत ही अच्छा हे,लेकिन एक बात् मुझे समझ नही आ रही? जब मास्टर जी ओर चर्च के पादरी की अग्रेजी नही आती थी, तो वो पत्र किस भाषा मे लिखते थे?कया उस अग्रेज महिला को हिन्दी आती थी या इन्हे सिर्फ़ WC का ही नही पता था,या यह सब भारतियो का....

सागर नाहर said...

पोस्ट से भी धांसू तो राज भाटिया का सवाल है। :)

Suraj said...

हास्य रस से परिपूर्ण इस लेख को मई १० में से ८ अंक देना चाहूँगा इसको पढ़ते समय मुझे ऐसा लगा जैसे कोई फिल्म इंटरवल तक कम अच्छी लगे और इंटरवल के बाद बस अब पूरा देख कर ही दम है वैसे ही यह लेख है जब मास्टर जी ख़त लिखने लगते है तो बस उसी समय से मन में हंसी के फौवारे छूटना शुरू और होंटों पे हंसी अपने आप ही आने लगती है ..............
वाह मज्जा आ गयाआआआआआआ .....................

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

:)

Rajesh said...

Hamesha ki tarah ek aur badhiya rachna. Anitaji, itni saral bhasha mein kitna kuchh kah jati hai aap. Hasya rason ka favvara ban paya hai yah article. Sochta hoon ki aap ka naam main THE GREAT INDIA LAUGHTER CHALLENGE mein bhijva doon........

anuradha srivastav said...

हहाहाहाहाहाहा.........

mamta said...

:)
बहुत खूब।
पढ़कर बहुत मजा आया।

yunus said...

अनीता जी इसे कहते हैं शानदार स्‍क्‍वायर कट । फुल मार्क्‍स । हे हे हे