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May 12, 2008

क्या आप ने इसे देखा है?

क्या आप ने इसे देखा है?








काली साड़ी में मैं, मेरा बेटा आदित्य और इंदिरा








एम ए के दिनों में हमारी एक बहुत ही प्यारी सी सहेली थी इंदिरा शर्मा। बहुत ही स्नेही और मिलनसार्। हमें उसके घर जाना बहुत अच्छा लगता था। वो यू पी से थी। उसके घर जा कर हम कुछ न बोलें और सिर्फ़ उसे अपनी मम्मी और दो छोटी बहनों से बतियाते सुने तो भी पूरा दिन निकाल सकते थे। आक बातचीत में भी उनका शब्दों का चयन और बोलने का लहजा हमारे कानों में रस घोलता था और दिल को एक अजीब सा सकून मिलता था। इंदिरा ये बात जानती थी। उस्के घर हम कितने बजे भी जाएं वो कभी खाना खाएं बिना न आने देती, जानती थी कि हम वैसे खाने को तरसते हैं। कई घंटे वहां गुजर जाते थे। हमारी शादी के बाद भी ये सिलसिला जारी रहा। हमारी ससुराल उसके घर के पास ही थी। पर समय कब एक सा रहा है। हमारी शादी के दो साल बीतते बीतते वो अपने भाइयों के पास अमेरिका चली गयी और हमने भी अपना नीड़ कहीं और बसा लिया। आदित्य की जिम्मेदारी भी आ गयी। अब इंदिरा का आना साल में सिर्फ़ एक बार होता था, दिसंबर के अंत में या जनवरी के शुरु में। अमेरिका में छुट्टी लेने का वही सही समय है। पर हमारी बदकिस्मती ऐसी थी कि वही समय होता था आदित्य के युनिट टेस्ट या फ़ाइनल परिक्षाओं का। उन दिनों में हमारे पास कोई वाहन भी न था। तो बस जगह की दूरी और समय की कमी के चलते हमारा एक दूसरे से मिलना छूटता चला गया। और हमारी ये प्यारी सी सहेली कहीं खो गयी है। हम यहां उसकी तस्वीर लगा रहे हैं इस उम्मीद में कि हिन्दी भाषी होने के कारण शायद वो ब्लोगस पढ़ती हो या आप में से शायद कोई इसको जानता हो। अगर आप इंदिरा को जानते हैं तो कहिएगा कि इंदू अनिता आज भी तुम्हारा इंतजार कर रही है।

16 comments:

प्रभाकर पाण्डेय said...

बहुत ही बढ़िया लिखती हैं आप। एक दिन आपकी सहेली अवश्य मिलेंगी। नमस्कार।

नीरज गोस्वामी said...

"बचपन के दिन भी क्या दिन थे, उड़ते फिरते तितली बन...." बचपन के मित्र उम्र के आखरी पड़ाव तक याद रहते हैं क्यों की वो मित्रता बिना किसी स्वार्थ के होती है... आप की सहेली आप को शीघ्र मिले येही कामना है ..अगर आप इतनी शिद्दत से याद कर रही हैं तो उनको मिलना ही पड़ेगा.
नीरज

राज भाटिय़ा said...

अनीता जी यु पी के लोग सेवा बहुत करते हे, यह सच हे ओर दिल से सेवा भाव भी रखते हे, यह हमारा भी तजर्वा हे, बाकी आप अगर थोडा बिस्तार से इंदिरा जी के बारे लिखती तो अच्छा था यानि उन का फ़ेमली नाम वगेरा...पति या भाईयो का नाम,हम दिल से चाहते हे आप की सहेली आप को जरुर मिले.

mahendra mishra said...

राज जी की बात से सहमत हूँ पहले ....उनके बारे मी पूरी जानकारी हो तो ब्लॉगर भाई जगत उनकी खोज ख़बर करे, फ़िर भी मन मे है विश्वास तो आपकी प्रिय मित्र आपको जरुर मिलेंगी

अनूप शुक्ल said...

जेहि पर जाकर सत्य सनेहू। मिलहिं सो तेहि नहिं कछु सन्देहू॥

anitakumar said...

आप सभी मित्रों की शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद

Udan Tashtari said...

उनके पतिदेव का नाम कुछ पता चले तो बताया जाये. कोशिश तो की ही जा सकती है. बड़ी शिद्दत से याद किया है आपने-जरुर मिलेंगी. शुभकामनायें.

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

अनिता जी अब खुश हो जाईये कुंभ से ही फरमान आ गया कुछ हुलिया बताईये उडन तश्तरी से खोज की जायेगी इंदिरा जी आपको मिलेंगी जरूर ।

हमारी शुभकामनायें ।

हर्षवर्धन said...

बिछड़े दोस्त मिले तो, हिंदी ब्लॉगिंग के लिए एक और महती उपलब्धि

Gyandutt Pandey said...

सच्चा स्नेह मिलन की आस का सम्बल है।

Rajesh said...

Kumbh ke Mele ke jaisi hi aapki kahani hai Anitaji. Aap itne sachhe dil se aap ki "Indu" ko yaad kar rahi hai, aapko jaroor hi mil jayegi aap ki wah saheli. Aur vaise bhi zindagi ki shuruat ke dinon mein bane doston ki jyada hi yaad aati hai kyon ki us rishton mein koi swarth nahi hota.... I wish you all the best.

Sanjeet Tripathi said...

मिलेगी मिलेगी!!
अब ऐसा तरीका आपके इस्तेमाल किया है तो मिलेगी ही वह, शुभकामनाएं

अभिषेक ओझा said...

भगवाने चाहा तो आपकी मुलाक़ात जरूर होगी. अगर कुछ और जानकारी दें तो कोशिश तो की ही जा सकती है. और मिलना थोड़ा आसान हो सकता है... जैसी शहर की जानकारी और उनके पति का नाम.

anitakumar said...

समीर जी, अभिषेक जी
वो सब पता होता तो बात क्या थी। जब तक हम मिलते थे उसकी शादी नहीं हुई थी, हमें तो ये भी पता नहीं कि अमेरिका में वो कौन से शहर में है। बस इतना ही बता सकते हैं कि 1977 में उसने हमारे साथ साइकोलोजी में एम ए किया था उसका स्पेशलाजेशन क्लीनिकल साइकोलोजी था और मेरा इंडस्ट्रिअल्। लेकिन वो साइकोलोजी से जुड़े काम नहीं कर रही थी जहां भी काम करती थी। …:)
सिर्फ़ ये फ़ोटो है अगर कहीं किसी पार्टी या गेट टुगेदर में दिख जाए और अच्छी यू पी की हिन्दी बोलती दिखे तो …॥

महेन said...

अरे हम भी कुछ मित्रों को खोज रहे हैं और इस मिशन मैं एक हद तक सफ़लता भी मिली है। इसका श्रेय मैं ओर्कुट को देता हुं। कोशिश कीजिये, ओर्कुट अन्कल बहुत काम की चीज़ हैं। आपकी सहेली भी ज़रूर मिल जायेंगी।
शुभकामनाएँ

G Vishwanath said...

अनिताजी,

चलिए, देखते हैं के मैं इस तलाश में आपकी मदद कर सकता हूँ या नहीं।

यहाँ पधारिए:
facesaerch.com
spelling नोट कीजिए, facesaerch, (facesearch नहीं)
Page खुलते ही, search box में आप किसी का भी नाम टाइप कर सकते हैं।
इस नाम से संबधित, अन्तर्जाल में सभी image files आपके सामने एक gallery के रूप में दिखेगी।
slider bar को खिसकाइए और तस्वीरें देखते जाईए। क्या आपकी सहेली यहाँ कहीं मिली?

क्या पता, नाम "Indira Sharma" शायद शादी के बाद बदल गया हो।
केवल "Indira" से कोशिश कीजिए।
मैंने आजामाकर देखा। शुरू में भूतपूर्व प्रधान मंत्री की तसवीरें दिखाई देंगी, इन्हें छोड़कर आगे निकलते जाइए। कई महिलाएं जिनका नाम इन्दिरा है, आपके सामने प्रस्तुत की जाएंगी। किसी एक तस्वीर पर क्लिक करने से उस व्यक्ति के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है।

अगर इससे काम न बना, तो मुझे Google Search के सिवा और कुछ सूझता ही नहीं. पर Google Search तो आपने पहले से ही Try की होंगी।
अगर आप अपने आपको Technologically Challenged महसूस कर रही हैं तो अपने बेटे आदित्य को यह काम सौंप दीजिए। आजकल बच्चे हम वयस्कों से कम्प्यूटर और अन्तरजाल के बारे में बहुत ज्यादा जानते हैं। ऊम्र जितनी कम हो, ज्ञान उतना ही ज्यादा।

आशा करता हूँ कि आपकी सहेली आपको, कभी न कभी, कहीं न कहीं मिल ही जाएंगी।
शुभकामनाएं और Best of Luck.
गोपालकृष्ण विश्वनाथ, जे पी नगर, बेंगळूरु