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सुस्वागतम

आपका हार्दिक स्वागत है, आपको यह चिट्ठा कैसा लगा? अपनी बहूमूल्य राय से हमें जरूर अवगत करावें,धन्यवाद।

August 15, 2007

दिवाली की रात

दिवाली की रात

कहने को चार दिवारें अपनी थीं
काले चूने से पुती हुई,
पहली दिवाली की शाम,
न दिया न बाती,
न जान न पहचान,
ठंडा चुल्‍हा, घर में बिखरा सामान,
अंजान बाजारों में ढूढ़ती पूजा का सामान,
दुकानों की जगमग,
पटाखों का शोर,
सलीके से सजी दियों की पक्‍तियां,
मेरे घर से ज्‍यादा मेरे मन में अधेंरा भर रहीं थीं,
अकेलेपन की ठिठुरन, बोझिल कदम,
लौटते हुए माँ लक्ष्‍मी से बार बार माफी मांग रही थी,
प्रार्थना कर रही थी,
इस अधेंरे ठडें घर पर नजर डाले बिना ना निकल जाना,
लौटी तो देखा दरवाजे पर दो सुंदर से दियेअपनी पीली पीली आभा फैला रहे थे,
दो सुदंर सी कन्‍यांए सजी सवंरी,
हाथों में दियों की थाली लिये खड़ी मुस्‍करा कर बोलीं,
आंटी दिवाली मुबारक,
आश्‍चॅयचकित मैं,
हँस कर बोलीं हमारे यंहा रिवाज है,
अपना घर दियों से रौशन करने से पहले पड़ोसियों के घर जगमगाओ,
शत शत प्रणाम उन पूर्वजों को जिन्‍होंने ये रस्‍मों रिवाज बनाये,
शत शत प्रणाम उन बहुओं को जिन्‍होंने ये रस्‍मों रिवाज खुले मन से अपनाये

6 comments:

sajeev sarathie said...

हँस कर बोलीं हमारे यंहा रिवाज है,
अपना घर दियों से रौशन करने से पहले पड़ोसियों के घर जगमगाओ,
waah kya baat hai anita ji maine aapki sabhi rachnayen padhi bahut achaa likhti hai aap
jesus ne kaha hai hum ek doosare ka pyaala bharen , piye nahi

Jit said...

Hello Anita:

All the poems created by you are really fantastic, honestly i never read the poems, but urs creation is owesome and enjoyed a lot. So dont stop ur creation work and shoot some more.. Awaiting for new poems. KEEP IT UP.. GOD BLESS YOU..

Mired Mirage said...

ऐसे पड़ोसी सबको मिलें । शायद यह आपका खुद का कमाल है कि आपको अच्छे लोग मिल जाते हैं ।
घुघूती बासूती

Rajesh said...
This comment has been removed by the author.
Rajesh said...

हँस कर बोलीं हमारे यंहा रिवाज है,
अपना घर दियों से रौशन करने से पहले पड़ोसियों के घर जगमगाओ
Waah anita ji, kya panktiyan banayi hai, kya soch hai aap ki. bhagwan kare ab yah reewaz sabhi jagah sabhi logon mein fail jaye. na hi kahin andhera rahega, na hi koi akela rahega. very nice.

Radhakrishnan said...

Phool aisa ho jo baag ko khushbu se bhar de, Hamsafar aisa ho jo andheron ko roshan kar de, Padosi aisa ho zindagi ko khushi se bhar de.............Wah Anitaji, Appne apne khoobsurat andaz mein iss baat ko kahi jo har insan ko kyal rakhna chahiye.

Appki kavitaye dil ko choo leti hai.