राहुल गांधी की शादी
शाम को घूमने निकले तो नये मॉल की तरफ़ निकल लिये। कित्ता बड़ा मॉल था जी, पांच मंजिला और कित्ती सारी दुकानें, अपने अपने साजो सामान से लैस, सजी धजी जगमग जगमग करती। अंदर घुसने को भी तीन तीन दरवाजे, दरवाजों पर संतरी। किसी तरह से सकुचाते सकुचाते हम सब से नजदीक के दरवाजे से अंदर घुस लिए। सतंरी ने पर्स तक खंकाल लिया, उसमें सिर्फ़ चिल्लर और कुछ मूंगफ़लियां थीं। इत्ती शर्म महसूस हुई, भला क्या सोचेगें संतरी भैया, कहां कहां से उठ के आ जाते हैं ऐसे ट्ट्पूंजीए लोग, चवन्नी , अठन्नी लिए हुए, यहां क्या मूंगफ़लियां बेचेगें। पता होता कि ये संतरी महाराज चेकिंग करने वाले हैं तो कुछ रुपये न डाल लेते पर्स में । खैर, उससे आखं चुराते हम आगे बढ़ लिए। सामने ही आलोक पुराणिक जी अपनी दुकान पर पूड़ियां छानते नजर आ गये। हमारी तो जैसे जान में जान आई, उधर ही बढ़ लिए, वैसे वो हमको नहीं जानते जी, हम उनकी पूड़ियों का ऑर्डर घर से देते हैं न जी।
आलोक जी ये बड़ी बड़ी सुनहरी पूड़ियां छान रहे थे, बिल्कुल वैसी जैसी बचपन में हमने करोल बाग के स्टेंडर्ड की दुकान की खाई थीं । पूड़ी और आलू की सब्जी इतनी तेज कि मुंह से सी सी न निकले तो नाम बदल दो। देखते ही मुहँ में पानी आ गया। हम इंतजार करने लगे कि कोई आके हमसे ऑर्डर ले ले। बगल वाली टेबल पर ही राहुल गांधी बैठा था, बड़ा अनमना सा, मुंह लटकाए।
आलोक जी ने नौकर से हमारा ऑर्डर लेने को कह अपनी चिरपरिचित मुस्कान बखेरते हुए राहुल को पूछा क्युं गुरु आज ये मुर्दनी कैसी। सब खैरियत तो है। अपने भी कान उधर लग गये(आदत से मजबूर, क्या करें)। पहले तो राहुल ने ना नुकुर की फ़िर एक लंबी सांस लेकर बोले
पता है यार मेरी उमर कित्ती हो गयी है?
आलोक जी थोड़ा अचकचाए, फ़िर बोले, हां तुम निक्कर पहन कर आते थे मेरी दुकान पर पूड़ियां खाने राजीव जी के साथ, ह्म्म्म्म्म, तो अब 32/33 के तो होगे। क्युं?नहीं यार मुझे लगता है मेरी शादी कभी न होगी.
अरे! ऐसा क्युं लगता है, अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है, अटल जी को देखो, अभी तक नहीं फ़सें।
मजाक मत करो यार, मैं सीरियस हूं।
अरे तुम इतने सुन्दर गबरू जवान हो, एक क्या हजार मिलेगीं।
नहीं यार मुझे लगता है मुझे तो कोई इम्पोर्ट करनी पड़ेगी, सोचता हूं एक इटली का चक्कर लगा ही आऊं।
अब आलोक जी थोड़ा झुंझुलाए। छालना नौकर के हवाले करते हुए उठ पड़े और राहुल की टेबल पर आते हुए बोले ऐसी क्या बात है, यहां भी एक से बढ़ कर एक हैं कभी हमारी मीडिया की क्लास में आओ, ये लो हमारा लुच्चई चश्मा, इससे सब बराबर दिखता है। रखो, रखो मेरे पास और भी हैं।
राहुल अब भी ठंड़े से बैठे रहे, चश्मा जरूर उन्हों ने जेब के हवाले कर दिया, बोले कोई फ़ायदा नहीं।
आलोक जी जरा चिंतित होते हुए बोले भई बात क्या है, कुछ बताओगे भी , आखिर दोस्त हैं तुम्हारे।
यार क्या बताऊं लड़कियां तो यहां भी एक से बढ़ कर एक हैं पर कौन मां बाप मेरी मां से पंगा लेगा?
क्युं सोनिया जी नहीं चाह्तीं कि तुम्हारी शादी हो?
वो तो कुछ नहीं कहतीं पर हमारी पार्टी वाले ही मेरी जान के दुश्मन हैं। आश्चर्य से आलोक जी ने पूछा वो कैसे?
यार तुम्हें दीन दुनिया की कोई खबर है नहीं, कभी दुकान से बाहर जाकर देखा है? जगह जगह पोस्टर लगे हैं
<pसोनिया>" गांधी को बहुमत दो"
"सोनिया गांधी को बहुमत दो"
अब बताओ कौन देगा अपनी बेटी मुझे।
गंभीर मुद्रा धारण करते हुए आलोक जी ने हुंकार भरी, "हुम्म! ये तो सोचने वाली बात है"।
तब तक राहुल दो प्लेट पूड़ियां चट कर चुके थे, पता नहीं चल रहा था कि आसूं तरकारी के तीखेपन के कारण हैं या अपनी हालत पर रो रहे हैं।
इतने में बाहर से युनुस जी की दुकान से मधुर सगींत के स्वर पूरे मॉल में फ़ैलने लगे, "खोया खोया चांद, खुला आस्मान्…।" आलोक जी की आखें चमक उठीं। राहुल के कान में फ़ुस्फ़ुसाते हुए बोले एक आइडिया है, तुम ममता बहन को कोनटेकट करो, बंगालने भी एक से बढ़ कर एक होती हैं अब सोहा अली खान को ही ले लो, खोया खोया चांद देखी कि नहीं , भैया, चांद तो वो थी, खोये खोये से हम थे, क्या लगी है। और फ़िर बंगाल में तो अभी ऐसे पोस्टर भी नहीं लगे जैसे तुम बता रहे हो। वैसे भी बहां कब कौन लेफ़्ट है और कौन राइट, पता ही नहीं चलता, तुम्हारा मामला फ़िट …
राहुल ने हैरानी से पूछा पर तुम तो राखी सावंत और मल्लिका शेरावत…॥ उसकी बात काटते हुए आलोक जी बोले अजी वो सब बहुत पुरानी बाते हो गयीं आज कल तो सोहा, विध्या बालन और प्रियंका का जमाना है।
अब वेटर बिल ले कर आ गया तो हम को उठना पड़ा, पता नहीं राहुल ने खोया खोया चांद देखी की नहीं।





21 टिप्पणियाँ अब तक:
वाह भाई वाह !!
हाय राम, राखी सावंत, से लेकर विद्या बालन तक सब आपने राहुल के हवाले कर दी हैं। बाकियों के लिए कुछ रहेगा या नहीं।
Didi....
Hansa hansa key maar dala apney..sach kya jaberdust kalam keenchi hai apney..
अलोक जी के जैसा टैलेंट वाला इंसान मिलना बहुत मुश्किल है. पढाते हैं, लिखते हैं, इनवेस्टमेंट का आईडिया देते हैं, पूरी छानते हैं. और तो और, लोगों को शादी के लिए काउन्सीलिंग तक करते हैं.....धन्य है.
कितना बड़ा दुःख है, राहुल जी का. लोग अपने राजनीतिज्ञ माँ-बाप से कितने खुश रहते हैं....लेकिन बेचारे राहुल जी.....:-)
राहुल के दुःख से मैं भी दुखी हूँ. इन लड्डुओं का चक्कर ही ऐसा है.
पर अलोक जी दुकान की बड़ी बड़ी सुनहरी पूड़ियां मेरा भी खाने का मन कर रहा है. क्या करूँ?
आलोक जी के बाद अब आप..... शत शत नमन !!
आप आलोकजी से कहें कि वे राहुलजी को कहें कि बेटा चिंता ना करें. उसकी शादी जिम्मेदारी पूरी कांग्रेस की है और ये कांग्रेसी एक न एक दिन इसके हाथ पीले करवा देंगे. आखिर पार्टी के लिए आगे भी तो नेताओ कि जरूरत पड़ना है.
for the first time I read a humous article from you mam ! I liked it.
अनीता जी आपने राहुल बाबा को आलोक के चक्कर में कहां फंसा दिया। वो तो अगड़म बगड़म में ही उसको फंसाए रहेंगे। ये कंग्रेसिए राहुल बाबा को युवाओं का मसीहा बनाने में लगे हैं और आप हैं कि पूड़ी खिला रही हैं। उसका असली काम हो जाता तो शायद दस जनपथ से बाहर की दुनियां देखने का समय मिलता। वैसे आपका इंपोर्टेड लड़की वाला आइडिया ही सबसे बढ़िया। अब तो लगता है यहां कुछ नहीं हो पाएगा।
अनिता जी पूडियो मैं इतनी खो गयी कि आस पास मैं चने बेचता घूम रहा था दिखा ही नहीं. कोई बात नहीं अगली बार गगा के बेचुन्गा शायद उन्हें पता चल जाये. आलोक जी कि दूकान खूब चल गयी है.
राहुल को क्या घसीटा है इसमे पता है हमारे गाओं मैं तो इस उमर मैं पडोसी लोग बरात की उम्मीद ही छोड़ देते है और अनिता जी है कि क्या क्या सुझाब दे रहे है विद्या बालन तक तो ठीक था पर राखी सावंत या अल्ला कैसी जोड़ी होगी और सुहागरात से पहले हर लप्पू पप्पू को पता होगा कि कैसी है और दुल्हे मियां घूघट उठने का इंतज़ार कर रहे होंगे. रही बात बहुमत की तो न स्पष्ट बहू सोनिया जी के भाग्य मैं है ना स्पष्ट बहू. जैसे सरकार औरो के सहारे चल रही है. ऐसे ही - अटल जी के लिए भी यही कहा था कि जिसके भाग्य में बहू नहीं उसे बहुमत कैसे मिलेगा. राहुल बाबा को बहुमत चाहिए तो जैसे भी हो एक बहू का इंतजाम कर ही लेना चाहिए और अनिता जी तो खोज में लग भी गयी है.
आलोक जी अक्सर वह सब कह जाते हैं जो हमें कहना होता है,लेट लतीफी का यह नुस्कान होता है। :(
आलोक जी आपके पीछे कोई और भी लाईन में खड़ा है..
राहुल की चिन्ता जायज है! ( अरे भाई आपकी राहुल के प्रति और राहुल की खुद के विवाह के प्रति क्यों कि अब वे सैंतीस के जो हो गये हैं)
आज पता चला कि हीरोइनों की और भी नयी खेप चली आयी है। अपना जी.के. और भी पुराना हो गया!
वाह भई, कमाल की लेखनी है आपकी । आलोक के पूडियों की खुशबू बिखेरती हुई । आभार ।
आरंभ
जूनियर कांउसिल
बढ़िया है। राहुल जी की चिंता जायज है। उनके लिये कुछ जुगाड़ करिये भाई। आपके कालेज में भी तो तमाम सुमुखि-सुन्दरियां होंगी। :)
ह्म्म, अपन तो भूल के भी आलोक जी की पूरी की दुकान पे नई जाने वाले जी!!
बेचारा राहुल पूरी खिलाते खिलाते उसे लड्डू खिला के पछताने का पूरा इंतजाम हो गया!!!
अनीता जी, आप तो धांसू च फ़ांसू राईटर बनते जा रही हैं!!
आनंदम् मंगलम्
राहुल के साथ साथ आलोकजी की भी खिंचाई हो गई है। पूड़ियों की दुकान की तो छोड़िये अब व्यंग्य की दुकान भी लुटने ही वाली है।
मज़ा आया अनिता जी।
इत्ते ब्लोगर लोगन के बीच मां राहुल बाबा किथे से आ गए जी? पर जो भी हो, छोड़ा किसी को नहीं आपने. वैसे ये सरे ब्लॉगर लोग छोड़ने के लायक होते भी नहीं हैं. जो जितना सताया हुआ होता है, उतना ही इनसे चुन चुन कर निपटता है. अज अलोक बाबु के जलवे हैं.. कौन जाने कभी अपन पर भी एक दो वार हो जाए.
ख़राब काम बस आपने एक ही किया. और वो ये कि पुडीयों की याद दिला दी. अब यहाँ पुणे में कहाँ से लाये वो पूडियाँ? जो भी हो, बड़ा ही अच्छा लिखा है आपने.
वाह! अच्छा है!
अनिता जी राहुल की चिन्ता कर रही हैं? कई मितान भी लाइन में जरा उनका भी ख्याल रखिये।
Anitaji, once again a great article. Bechara Rahul. Yah "Soniya ko BAHUMAT do" ke chakkar khamkha fans gaya hai bechara. Aur aap ki chinta bhi jayaj hai kyon 37 ka to ho hi chuka hai ab wah. Hamare yahan to itni umra mein 4-5 bachhon ka baap ho jata hai insaan. Aap thodi aur mehanat kar ke apni college se kisi ki sifaris kar dijiyega, bechare ka kaam ho jayega. Aur haan, agar Rahul khood yah article padh le to wah to pagal hi ho jayega.
बहुत दिनों के बाद आया आपके इस ब्लॉग पर और आपका यह पोस्ट आनंदित कर गया , अच्छा लगा पढ़कर , बहुत मजेदार है यह पोस्ट , बधाईयाँ !
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